दोस्तों का असर इस बात पर होता है कि हमें क्या सामान्य लगता है। वे ईमानदार रहने, कुछ नया करने और मदद माँगने में सहारा दे सकते हैं। वे हमारे मूल्यों के खिलाफ काम करने का दबाव भी डाल सकते हैं।

दोस्त सोच-समझकर चुनने का मतलब सफल या बिना कमी वाले लोग खोजना नहीं है। मतलब यह देखना है कि आप एक-दूसरे के साथ कैसा व्यवहार करते हैं।

एक उदाहरण

एक उदाहरण सोचिए। एक युवा अपने दोस्तों के साथ मज़े करता है, लेकिन उसकी निजी गलतियाँ अक्सर दूसरों के बीच मज़ाक बन जाती हैं। किसी योजना को मना करने पर उसका मज़ाक उड़ाया जाता है।

वह अपनी परेशानी बताता है। एक दोस्त सुनता है और बदलता है। दूसरा निजी बातें साझा करता रहता है और कहता है कि वह छोटी बात का बुरा मानता है।

सभी दोस्तियाँ एक साथ खत्म करने के बजाय युवा उस व्यक्ति से कम निजी बातें करने लगता है जो सीमा का सम्मान नहीं करता। वह सम्मान करने वाले लोगों के साथ ज़्यादा समय बिताता है।

इस उदाहरण में, आदत बदलते समय अकेलापन लग सकता है। परिचित साथ का विकल्प ढूँढ़ना आसान नहीं होता।

युवा को साबित नहीं करना कि कोई पूरी तरह अच्छा या बुरा है। बार-बार के व्यवहार को देखकर तय करना है कि कितनी नज़दीकी उचित है।

मैंने क्या सीखा

दोस्त आपसे असहमत होकर भी आपकी बहुत परवाह कर सकता है। अलग कमाई, पृष्ठभूमि, रुचि या राय किसी को खराब दोस्त नहीं बनाती।

अच्छी दोस्तियों में भी गलतियाँ होती हैं। देखें कि व्यक्ति सुनने और सुधारने को तैयार है या नहीं। बार-बार अपमान, दबाव या भरोसा तोड़ना, एक खराब दिन से ज़्यादा ध्यान माँगता है।

देखें कि आपके मना करने, गलती करने या अच्छी खबर साझा करने पर क्या होता है। क्या आपकी निजी बात सुरक्षित रहती है? क्या आप डर के बिना परेशानी बता सकते हैं?

भरोसा धीरे-धीरे बढ़ने दें। हर किसी को अपने समय और निजी जीवन में बराबर जगह देना ज़रूरी नहीं। जहाँ सुरक्षित हो, बदलाव तय करने से पहले अपनी परेशानी साफ़ कहें।

खुद भी ये गुण अपनाएँ। निजी बात निजी रखें, दोस्त की सफलता पर खुश हों, ज़रूरत पर माफ़ी माँगें और मदद करें। दोस्ती को फायदा उठाने का रास्ता न बनाएँ।

मैं चाहता हूँ कि मेरे बच्चों को ऐसे दोस्त मिलें जो खुशी और सच्चाई दोनों लाएँ। अपनी और दूसरों की गलतियों के प्रति धैर्य रखें। लेकिन बार-बार के अनादर को वफ़ादारी के नाम पर सहना ज़रूरी न समझें।

आज यह करके देखें

  1. एक अच्छे दोस्त की सराहना करें।उसके व्यवहार की कोई खास बात बताएँ जिसकी आप कद्र करते हैं।
  2. बार-बार होने वाला एक व्यवहार देखें।लिखें कि कौन-सा व्यवहार दोस्ती में सुरक्षित या असहज महसूस कराता है।
  3. जैसी परवाह चाहते हैं, वैसी करें।निजी बात सुरक्षित रखें, ध्यान से सुनें या बदले की उम्मीद बिना मदद करें।

आपके लिए एक सवाल

किस दोस्त के साथ आप बिना डर के सच कह पाते हैं?