महँगी चीज़ थोड़े समय के लिए ध्यान खींच सकती है। लोग ध्यान देना छोड़ दें, उसके बाद भी किस्तें चल सकती हैं।

कर्ज़ लेना हमेशा गलती नहीं है। लेकिन मुख्य रूप से सफल दिखने के लिए उधार लेना, किसी स्थायी ज़रूरत को पूरा किए बिना आगे के चुनाव कठिन कर सकता है।

एक उदाहरण

एक उदाहरण सोचिए। किसी को नया फोन चाहिए क्योंकि सहकर्मी अपने फोन बदल रहे हैं। महीने की किस्त छोटी लगती है, इसलिए वह पूरी कीमत के बजाय उसी पर ध्यान देता है।

सिर्फ उदाहरण के लिए, 1,000 की बारह किस्तों का कुल 12,000 होता है। शुल्क या दूसरे खर्च इसे और बढ़ाएँगे। महीने की रकम अकेले पूरी ज़िम्मेदारी नहीं दिखाती।

खरीदने के बाद उत्साह कम हो जाता है। किस्तें बनी रहती हैं और परिवार का अचानक खर्च बजट बिगाड़ देता है।

इस उदाहरण में, फोन अच्छा काम कर सकता है, लेकिन खरीदार को उम्मीद वाला स्थायी आत्मविश्वास नहीं मिला। दूसरी ज़रूरतों के लिए उपलब्ध पैसा भी कम हुआ।

खरीदार समझौता पढ़ता है और चुकाने की योजना बनाता है। सीख यह है कि अगली खरीद से पहले अच्छी तरह सोचें, शर्म से बचने के लिए खरीदते न रहें।

मैंने क्या सीखा

सम्मान और अपनापन चाहना स्वाभाविक है। इसके लिए शर्मिंदा करने से किसी को अपना खर्च समझने में शायद ही मदद मिलती है।

लागत और जोखिम के अनुसार कुछ उधार उपयोगी उद्देश्य पूरा कर सकते हैं। सवाल है कि यह खास खरीद आपकी ज़िंदगी में इतना फायदा करती है या नहीं कि उसकी ज़िम्मेदारी लेना उचित हो। कर्ज़ मिल सकना इस बात का प्रमाण नहीं कि आप उसे आराम से चुका सकते हैं।

पूरी चुकाई जाने वाली रकम निकालें। शर्तें पढ़ें और ब्याज, शुल्क तथा नियमित खर्च जोड़ें। सस्ती चीज़ लेने या इंतज़ार करने से तुलना करें।

सोचें कि कमाई घटे या ज़रूरी खर्च बढ़े तो क्या होगा। केवल एक अच्छे महीने के आधार पर यह न तय करें कि खरीद संभव है।

गैरज़रूरी खरीद से पहले थोड़ा समय दें। पूछें कि आप चीज़ उसके इस्तेमाल के लिए चाहते हैं या दूसरों की प्रतिक्रिया के लिए। दोनों भावनाएँ हो सकती हैं, लेकिन जानें कि पैसा किसलिए दे रहे हैं।

मैं चाहता हूँ कि मेरे बच्चे उपयोगी चीज़ों का आनंद लें, हर खरीद से अपनी सफलता साबित करने की ज़रूरत महसूस न करें। बचत और कम देनदारियों पर तारीफ़ शायद न मिले, लेकिन वे रोज़ का जीवन आसान कर सकती हैं।

आज यह करके देखें

  1. एक गैरज़रूरी खरीद रोकें।कुछ दिन इंतज़ार करें और देखें कि इच्छा बदलती है या नहीं।
  2. पूरी लागत निकालें।हर भुगतान और संबंधित शुल्क जोड़ें, सिर्फ महीने की रकम नहीं।
  3. दूसरा विकल्प देखें।सस्ती चीज़, कुछ इंतज़ार या मौजूदा चीज़ के इस्तेमाल पर विचार करें।

आपके लिए एक सवाल

अगर किसी और को पता न चले, तो क्या आप तब भी यह चीज़ खरीदना चाहेंगे?