भरोसा रोज़ के व्यवहार से बढ़ता है। लोग देखते हैं कि आप वादा निभाते हैं या नहीं, सच बताते हैं या नहीं और कुछ गलत होने पर खबर देते हैं या नहीं।

भरोसेमंद होने का मतलब कभी गलती न करना नहीं है। इसका मतलब है कि दूसरे आपसे जो उम्मीद कर रहे हैं, उसकी ज़िम्मेदारी लें।

एक उदाहरण

एक उदाहरण सोचिए। आपने मंगलवार तक एक दस्तावेज़ भेजने का वादा किया है। सोमवार को समझ आता है कि दूसरे काम के कारण वह समय पर पूरा नहीं होगा।

शर्मिंदगी होती है। मन करता है कि चुप रहें और किसी तरह पूरा कर लें। लेकिन दूसरा व्यक्ति उसी दस्तावेज़ के आधार पर अपना काम तय करने वाला है।

आप संदेश भेजते हैं: “मंगलवार तक पूरा नहीं कर पाऊँगा। पहला हिस्सा तैयार है, लेकिन आँकड़ों के लिए एक दिन और चाहिए। क्या बुधवार दोपहर तक भेजने से आपका काम चल सकेगा?”

संदेश भेजने से देरी खत्म नहीं हुई। दूसरे व्यक्ति को निराशा हो सकती है या कोई और रास्ता चाहिए हो सकता है। लेकिन अब उसके पास योजना बदलने की जानकारी है।

आप जाँचते हैं कि नई तारीख निभा सकते हैं और आगे की खबर देते रहते हैं। इस उदाहरण में सच बताने और उसके बाद काम पूरा करने से भरोसा बचता है।

मैंने क्या सीखा

कई वादे इसलिए टूटते हैं क्योंकि हम बहुत जल्दी हाँ कह देते हैं। मदद करना चाहते हैं या किसी को निराश नहीं करना चाहते। लेकिन जिस वादे को निभा नहीं सकते, उससे सोचकर मना करना बेहतर हो सकता है।

बीमारी या आपात स्थिति में कोई भी योजना बदल सकती है। जब संभव हो, ज़रूरी बात बताएँ। उपयोगी खबर देने के लिए अपनी सारी निजी बातें बताना ज़रूरी नहीं है।

हाँ कहने से पहले देखें कि काम में क्या लगेगा और आपने पहले से क्या ज़िम्मेदारियाँ ली हैं। क्या देंगे और कब देंगे, यह साफ करें। “कोशिश करूँगा” और “शुक्रवार को दे दूँगा” अलग उम्मीदें पैदा करते हैं।

छोटी सूची या याद दिलाने का तरीका रखें। वादा निभाना मुश्किल लगे तो जहाँ संभव हो, समयसीमा से पहले बात करें। बताएँ कि क्या बदला और अब क्या किया जा सकता है।

किसी को निराश किया हो तो उस पर पड़े असर को मानें और बात ठीक करने का ऐसा रास्ता सुझाएँ जिसे निभा सकें। सिर्फ बातचीत खत्म करने के लिए नया वादा न करें।

मैं चाहता हूँ कि मेरे बच्चे हर बात पर हाँ कहने से ज़्यादा भरोसेमंद होने को महत्व दें। सम्मान से मना किया जा सकता है। हाँ कहें तो इतना ध्यान रखें कि दूसरा व्यक्ति उस वादे पर अपनी योजना बना सके।

आज यह करके देखें

  1. एक अधूरा वादा देखें।उसे आज पूरा करें या इंतज़ार कर रहे व्यक्ति को सही जानकारी दें।
  2. अगली बार हाँ कहने से पहले रुकें।ज़रूरत हो तो कहें, “देखकर पक्का बताता हूँ।”
  3. एक याद दिलाने वाली तारीख रखें।वादा लिखें और समयसीमा से पहले उसकी प्रगति देखने का दिन तय करें।

आपके लिए एक सवाल

आपके किए किस वादे के पूरा होने का कोई इंतज़ार कर रहा है?