हम अक्सर सोचते हैं कि आत्मविश्वास आने पर कोई ज़रूरी काम शुरू करेंगे। लेकिन कोशिश करने, गलतियों से सीखने और हालात संभालने से भी भरोसा बन सकता है।
हिम्मत का मतलब डर न लगना नहीं है। घबराहट के बावजूद तैयारी के साथ एक समझदारी भरा कदम उठाना भी हिम्मत है।
एक उदाहरण
एक उदाहरण सोचिए। आपको पहली बार किसी बैठक में अपनी बात रखनी है। विषय जानते हैं, लेकिन अनुभवी लोगों के सामने बोलने में डर लग रहा है। चिंता है कि आवाज़ काँपेगी या कुछ भूल जाएँगे।
सबको प्रभावित करने के बजाय आप तीन उपयोगी बातें साफ समझाने का लक्ष्य रखते हैं। बोलकर अभ्यास करते हैं, एक उलझी हुई स्लाइड पर दोस्त की राय लेते हैं और पहला वाक्य लिख लेते हैं।
बैठक शुरू होने पर घबराहट बनी रहती है। एक बार आप भूल जाते हैं कि आगे क्या कहना है। रुककर नोट्स देखते हैं, फिर बोलना जारी रखते हैं।
प्रस्तुति बिल्कुल सही नहीं हुई, लेकिन उससे सीखने को मिला। पता चला कि कौन-सी बात अच्छी तरह समझ आई और किस सवाल का बेहतर जवाब चाहिए।
अगली बार भी असहज लग सकता है। फर्क यह है कि अब आपके पास एक अनुभव है। आप जानते हैं कि रुकने या गलती होने के बाद भी बात आगे बढ़ सकती है।
मैंने क्या सीखा
तैयारी उपयोगी है। लेकिन कभी-कभी हम तैयारी करते रहने के बहाने शुरुआत टालते हैं। खुद से पूछें कि क्या सचमुच कुछ ज़रूरी सीखना बाकी है या नई कोशिश की असहजता से बच रहे हैं।
हर डर को अनदेखा नहीं करना चाहिए। खतरनाक स्थिति में सुरक्षा पहले आती है। जिस काम से आपको या किसी और को गंभीर नुकसान हो सकता हो, उसमें विशेषज्ञ की मदद की ज़रूरत पड़ सकती है। असहजता और खतरे का फर्क समझना भी हिम्मत का हिस्सा है।
कोई ज़रूरी काम चुनकर उसे छोटा करें। एक सवाल पूछें, एक आवेदन भेजें या तैयार किए हुए वाक्य से बातचीत शुरू करें।
पहले तय करें कि एक ठीक-ठाक कोशिश कैसी होगी। बिल्कुल सही करना ज़रूरी नहीं, लेकिन ज़िम्मेदारी से काम करने लायक तैयारी ज़रूरी है।
बाद में सिर्फ यह न सोचें कि कितनी घबराहट हुई। देखें कि क्या हुआ, क्या संभाल पाए और अगली बार किस एक बात का अभ्यास करना है।
मैं चाहता हूँ कि मेरे बच्चे यह जानें कि सीखते हुए गलती होना शर्म की बात नहीं है। काँपती आवाज़ किसी ईमानदार कोशिश की कीमत कम नहीं करती। असली खतरे में सावधानी रखें, लेकिन हर उपयोगी कदम के आसान लगने का इंतज़ार न करें।
आज यह करके देखें
- एक छोटा काम चुनें।ऐसा सुरक्षित काम लिखें जिसे घबराहट के कारण टाल रहे हैं।
- शुरुआत की तैयारी करें।पहला वाक्य या पहला कदम लिखें और कोशिश का समय तय करें।
- कोशिश को फिर देखें।एक बात लिखें जो संभाल पाए और एक जिसका आगे अभ्यास करेंगे।
आपके लिए एक सवाल
घबराहट बनी रहे, तब भी इस हफ्ते कौन-सा उपयोगी कदम उठा सकते हैं?