बाकी सारे काम खत्म होने से पहले भी स्वास्थ्य पर ध्यान देना ज़रूरी है। करने को अक्सर और काम मिलता रहेगा।
अपनी देखभाल करने से कभी बीमार न पड़ने की गारंटी नहीं मिलती। इससे आप अपनी ज़रूरतों का ध्यान रख सकते हैं और समझ सकते हैं कि कब मदद चाहिए।
एक उदाहरण
एक उदाहरण सोचिए। व्यस्त समय में एक कर्मचारी बार-बार भोजन, चलना-फिरना और नींद टालता है। परियोजना खत्म होते ही दूसरी समय-सीमा सामने आ जाती है और यही क्रम चलता रहता है।
लगातार थकान और सिरदर्द होने पर भी वह कम काम वाले सप्ताह का इंतज़ार करता है। आखिर वह डॉक्टर से मिलने का समय लेता है और अपनी परेशानी बताता है।
उचित सलाह मानने के साथ वह कुछ छोटे बदलाव करता है: सरल भोजन पास रखना, काम के बीच विराम लेना और काम रोकने का समय अधिक नियमित रखना।
इस उदाहरण में, कर्मचारी स्वास्थ्य को नियमित ध्यान देने वाली ज़रूरत मानने लगता है। वह लक्षणों पर नज़र रखता है और दोबारा सलाह लेता है, यह मानकर नहीं चलता कि नई दिनचर्या से सब ठीक हो जाएगा।
कुछ बदलाव रोज़ के जीवन में मदद कर सकते हैं। लगातार बने लक्षणों की और जाँच ज़रूरी हो सकती है। अहम कदम है परेशानी को अनदेखा करना बंद करना।
मैंने क्या सीखा
हर व्यक्ति का शरीर, अक्षमता, साधन और ज़िम्मेदारियाँ अलग होती हैं। एक व्यक्ति के लिए ठीक दिनचर्या दूसरे के लिए ठीक नहीं हो सकती। बीमारी कम अनुशासन का प्रमाण नहीं है।
स्वास्थ्य की सलाह सख्त खानपान, व्यायाम या ज़्यादा काम करने की प्रतियोगिता नहीं बननी चाहिए। उसका उद्देश्य आपकी परिस्थितियों में शरीर की देखभाल करना है, ज़रूरत पर योग्य पेशेवर की मदद के साथ।
उन बुनियादी ज़रूरतों से शुरू करें जिन्हें टाल रहे हैं। देखें कि दिन में भोजन, आराम, आपके अनुकूल शारीरिक गतिविधि और पहले से सुझाई गई देखभाल की जगह है या नहीं।
किसी और की कठिन योजना अपनाने के बजाय टिक सकने वाले बदलाव चुनें। लक्षणों, उचित गतिविधि या जाँच को लेकर संदेह हो तो योग्य स्वास्थ्य पेशेवर से पूछें।
आसपास की परिस्थितियाँ भी देखें। काम का बोझ और इलाज तक पहुँच मायने रखते हैं। असुरक्षित काम या मदद की कमी से बनी हर समस्या निजी दिनचर्या से हल नहीं हो सकती।
मैं चाहता हूँ कि मेरे बच्चे अपनी देखभाल करें, यह सोचे बिना कि स्वास्थ्य का हर परिणाम उनके नियंत्रण में है। कोई बात परेशान करे तो मदद लें। आपकी ज़रूरतें ध्यान देने लायक हैं, भले उन्हें पूरा करने पर कोई दिखाई देने वाली उपलब्धि न मिले।
आज यह करके देखें
- एक अनदेखी ज़रूरत पहचानें।ऐसा बदलाव चुनें जिससे भोजन, आराम या आपके अनुकूल गतिविधि आसान हो।
- स्वास्थ्य पर बात करने की तैयारी करें।लगातार बनी परेशानी लिखें और उसे टालने के बजाय योग्य पेशेवर की सलाह लें।
- अपनी दिनचर्या परखें।ज़रूरतों के अनुकूल बदलाव रखें और मुश्किलों पर किसी मदद कर सकने वाले व्यक्ति से बात करें।
आपके लिए एक सवाल
कौन-सी स्वास्थ्य की ज़रूरत आप इसलिए टाल रहे हैं कि दूसरे काम ज़्यादा ज़रूरी लगते हैं?